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मायावती एक भारतीय महिला राजनीतिज्ञ है और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री रह चुकी हैं. वह ‘बहुजन समाज पार्टी’ की अध्यक्ष हैं. पूरे भारत की सबसे युवा महिला मुख्यमंत्री के साथ-साथ सबसे प्रथम दलित मुख्यमंत्री भी होने का श्रेय प्राप्त है,  और उन्होंने सत्ता के साथ आने वाली कठिनाइयों का सामना भी किया है.

मायावती की जीवनी

15 जनवरी 1956, नई दिल्ली में मायावती का जन्माम हुआ.यावती ने अपने कैरियर की शुरूआत एक स्कूल शिक्षिका के रूप में किया था, लेकिन कांशीराम की विचारधारा और कर्मठता से प्रभावित होकर उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया. उनका राजनैतिक इतिहास काफ़ी सफल रहा और 2003 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद उन्होंने सन 2007 में फिर से सत्ता में वापसी की. अपने समर्थकों में ‘बहन जी’ के नाम से मशहूर मायावती 13 मई 2007 को चौथी बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी और पूरे 5 वर्ष शासन के पश्चात सन 2012 का चुनाव अपनी प्रमुख प्रतिद्वंदी समाजवादी पार्टी से हार गई.

मायावती का प्रारंभिक जीवन

चंदावती देवी मायावती का असली नाम है. उनका जन्म 15 जनवरी 1956 को दिल्ली में हुआ था. उनकी माता का नाम रामरति और पिता का नाम प्रभु दयाल है. उनके पिता प्रभु दूरसंचार केंद्र में अफसर थे. मायावती के 6 भाई हैं. उन्होंने कालिंदी कॉलेज दिल्ली से कला में स्नातक की उपाधि ली उसके बाद से दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी और बीएड भी किया. उनके पिता उन्हें कलेक्टर बनाना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने अपना बहुत सारा वक्त भारतीय प्रशासनिक सेवा की तैयारी में लगा दिया. अपनी तैयारी के दौरान उन्होंने शिक्षिका के रूप में कार्य करना शुरू किया.

मायावती के जीवन में कांशी राम के बढ़ते प्रभाव से उनके पिता बिल्कुल भी खुश नहीं थे. उन्होंने मायावती को कांशी राम के पद चिन्हों पर ना चलने की सलाह दी, लेकिन मायावती ने अपने पिता की एक न सुनी और बड़े पैमाने पर कांशी राम द्वारा शुरू किए गए कार्य और परियोजना से जुड़ गई.

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राजनैतिक जीवन मायावती का 

सन 1984 तक मायावती ने बतौर शिक्षिका काम किया है. वह कांशी राम के कार्य और साहस से काफ़ी प्रभावित थी. 1984 में जब कांशीराम ने एक नए राजनीतिक दल ‘बहुजन समाज पार्टी’ का गठन किया. जिसके बाद मायावती शिक्षिका की नौकरी छोड़कर पार्टी की पूर्ण कालिक कार्यकर्ता बन गई. उसी साल उन्होंने मुजफ्फरनगर जिले को कैराना लोकसभा सीट से अपना पहला चुनाव अभियान आरंभ किया. सन 1985 और 1987 में भी उन्होंने लोकसभा चुनाव में कड़ी मेहनत की आखिरकार सन 1989 में उनके दल ‘बहुजन समाज पार्टी’ ने 13 सीटों पर चुनाव जीत लिया.

बसपा में मायावती

पार्टी का प्रभाव धीरे-धीरे दलित और पिछड़े वर्ग में बढ़ता गया और सन 1995 में वे उत्तर प्रदेश की गठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री बनाई गई. सन 2001 में पार्टी के संस्थापक कांशीराम ने मायावती को दल के अध्यक्ष के रूप में अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया. 2002 से 2003 के दौरान ‘भारतीय जनता पार्टी’ की गठबंधन सरकार में मायावती फिर से मुख्यमंत्री चुनी गई. इसके पश्चात बीजेपी ने सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया और मायावती सरकार गिर गई इसके बाद मुलायम सिंह यादव को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया

इसके बाद सन् 2007 के विधानसभा चुनाव के बाद मायावती फिर से सत्ता में लौट आयीं और भारत के सबसे बड़े राज्य की कमान संभाली. मायावती के शासनकाल के दौरान उत्तर प्रदेश के बाहर बसपा का विस्तार नहीं हो पाया क्योंकि उनके निरंकुश शासन के चलते ज़्यादातर पिछड़े वर्ग के लोगों ने उनसे मुंह मोड़ लिया. मायावती ने अपने कार्यकाल के दौरान दलित और बौद्ध धर्म के सम्मान में कई स्मारक स्थापित किये.

मायावती की राजनीति में पहचान

अपने शासनकाल में मायावती कई विवादों और घोटालों के आरोपों में रही हैं, पर उनका राजनीतिक अभ्युदय सचमुच अद्भुत रहा है. एक सामान्य परिवार से आई दलित महिला ने ऐसा मक़ाम हासिल किया जैसा इस देश के इतिहास में कम ही महिलाओं ने किया होगा. विवादों की परवाह किए बिना मायावती के समर्थकों ने हर बार उनका साथ दिया और अपनी वफ़ादारी साबित की. मायावती ने दलितों के दिल में अपनी खुद की जगह बनाई है और दलितों में अपने प्रति विश्वास कायम किया है

मायावती का जीवन परिचय

1956 दिल्ली में जन्म
1977 शिक्षिका के रूप में करियर की शुरुआत
1984 शिक्षिका की नौकरी छोड़ बसपा में प्रवेश, अपने पहले लोकसभा चुनाव अभियान का प्रारम्भ
1989 लोकसभा चुनाव में बसपा ने 13 सीटों पर जीत हासिल की
1995 उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में चुनी गयीं
1997 दोबारा मुख्यमंत्री के रूप में चुनी गयीं
2001 कांशीराम की उत्तराधिकारी घोषित की गयीं
2002 फिर उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं
2007 चौथी बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं

 

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