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सुपरकंप्यूटर क्या है | Supercomputer Kya Hai

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सुपरकंप्यूटर क्या है, सुपरकंप्यूटर का इतिहास, सुपरकंप्यूटर के फ़ायदे, सुपरकंप्यूटर की कीमत कितनी है, सुपरकंप्यूटर कैसे काम करता है, सुपरकंप्यूटर क्या काम करता है, दुनिया का सबसे तेज सुपरकंप्यूटर, भारत का सबसे तेज सुपरकंप्यूटर (Supercomputer Kya Hai, Supercomputer History, Supercomputer Price, Supercomputer Ke Fayde, Duniya Ka Sabse Tej Supercomputer, India Ka Sabse Tej Supercomputer, Supercomputer Kisne Banaya)

Supercomputer के बारे में तो आपने सुना ही होगा. यह एक ऐसा Computer है जिसकी Working Capacity आम कंप्यूटर की तुलना में बहुत ज्यादा होती है. इसी कारण से इसे Supercomputer कहा जाता है. इन कंप्यूटरों का प्रदर्शन उच्च प्रणाली का होता है. इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक कार्यों के लिए किया जाता है, जिनमें अत्यधिक उच्च गति की जरूरत होती है. आम कंप्यूटर के मुकाबले इनकी Processing Speed हजार गुना ज्यादा तेज होती है.  इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताएंगे कि Supercomputer Kya Hai, सुपर कंप्यूटर कैसे काम करता है. (ब्लॉगिंग कैसे करें)

सुपरकंप्यूटर क्या है (Supercomputer Kya Hai)

सामान्य कंप्यूटर की तुलना में सुपर कंप्यूटर का प्रदर्शन उच्च स्तर का होता है. सुपर कंप्यूटर General Purpose Com8 की मुकाबले बहुत High Level की Calculation and Computing Perform कर सकता है. यह आम कंप्यूटर से हजारों गुना ज्यादा तेज काम करता है. इसीलिए इसे सुपरकंप्यूटर का नाम दिया गया है. दूसरे कंप्यूटर सिस्टम की तुलना में यह काफी Fast और Powerful होता है. इसमें सामान्यतः Floating Point Operation में प्रति सेकंड मिले निर्देशों की बजाय प्रति सेकंड में मापा जाता है. जहां पर ज्यादा Power and Fast Processing के साथ Real Time Task Perform की जरूरत होती है, वहां इस कंप्यूटर सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है.

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सुपरकंप्यूटर किसने बनाया (Supercomputer Kisne Banaya)

यदि सुपरकंप्यूटर की बात करें तो इसके पीछे किसी एक व्यक्ति का हाथ नहीं है. इसमें पूरी टीम का योगदान है. सुपर कंप्यूटर का बनाने का श्रेय Seymour Cray (1925-1996) को जाता है. इन्हें ‘सुपरकंप्यूटर का जनक’ कहा जाता है.

सुपरकंप्यूटर का इतिहास (History of Supercomputer)

1946 में पेंसिलवेनिया यूनिवर्सिटी के जॉन मौचली एवं ज. प्रेस्पर एकर्ट के द्वारा एक सामान्य उद्देश्य हेतु इएनआईएसी नामक 25 मीटर लंबा तथा 30 टन वजनी सुपर कंप्यूटर का निर्माण किया गया था.इसी को दुनिया का सबसे पहला सुपर कंप्यूटर कहा जाता है.

1953 आईपीएल कंपनी के द्वारा एक डिफरेंस कैलकुलेटर जाने के जनरल उद्देश्य कंप्यूटर को विकास करने का निर्णय लिया गया और इसी के आधार पर आईबीएम के इंजीनियर जीन अम्दहल जीने आईबीएम 704 का निर्माण किया जो एक 5 KFLOPS की गणना करने के लिए पर्याप्त था.

1956 में आईबीएम कंपनी ने los alamos National laboratory नामक एक लेबोरेटरी के लिए स्ट्रेच नामक एक सुपर कंप्यूटर का निर्माण किया और यह करीब वर्ष 1964 तक सबसे तेज दुनिया का सुपर कंप्यूटर माना गया.

सुपरकम्प्युटर 

1957 सीडीएस कंपनी के सह संस्थापक माननीय सीमोरे क्रें ने एक सबसे तेज, ट्रांजिस्टर युक्त एवं हाई स्पीड परफॉर्मेंस पर कार्य करने वाले कंप्यूटर को बनाने की पहल शुरू कर दी. फिर जाकर उन्होंने सीरियस 1604 नामक एक सुपर कंप्यूटर को बनाकर अन्य लोगों के सामने पेश किया एवं ठीक वर्ष 1964 में इस महानुभाव व्यक्ति ने सीडियस 6600 नामक एक सुपरकंप्यूटर को बनाकर संपूर्ण विश्व के सामने लांच किया. यह पहला ऐसा सुपरकंप्यूटर बना जो आईबीएम के पिछले दो सुपर कंप्यूटर को कड़ी टक्कर देने के लिए योग्य था.

1972 सीमोरे क्रें ने कंट्रॉल डाटा को छोड़ने के बाद एक सबसे बेहतरीन हाई एंड कंप्यूटर के निर्माण हेतु इन्होंने क्रें नामक रिसर्च सेंटर की स्थापना की.

1976 इसी वर्ष los alamos National academy ने अपना पहला क्रे-1 नामक एक सुपर कंप्यूटर को मार्केट में उतारा और इसकी स्पीड लगभग 160 mflops की थी.

1979 क्रे-1 सुपर कंप्यूटर से भी सबसे ज्यादा तेज कंप्यूटर को विकसित करने का कार्य शुरू किया गया. क्रे-2 नामक सुपर कंप्यूटर में आठ सीपीयू के साथ 1.9 gflops के स्पीड के साथ करना को कर सकता था और इसमें तारों की लंबाई 120 सेंटीमीटर से सीधे घटाकर 41 सेंटीमीटर तक कर दी गई थी और यह सभी सुपर कंप्यूटर के मुकाबले काफी ज्यादा तेज कार्य करने लगा.

1989 में सीमोर क्रें ने क्रें कंप्यूटर नामक एक कंपनी का निर्माण किया और इसमें क्रें-3 एवं क्रें-4 सुपर कंप्यूटर का निर्माण किया.

1990 यह वर्ष काफी ज्यादा सुपर कंप्यूटर निर्माता कंपनियों के लिए तंगी भरा रहा और फिर पावरफुल आरआईएससी वर्क स्टेशनों को पेश किया गया और जिन्हें सिलिकॉन ग्राफिक द्वारा डिजाइन किया गया था.

1993 में 166 वेक्टर प्रोसेसर के साथ Fujitsu numerical wind tunnel नामक सुपर कंप्यूटर का निर्माण किया गया और यह अब तक सभी सुपर कंप्यूटर के मुकाबले बहुत ही ज्यादा सुपरफास्ट तरीके से कार्य करने लगा.

सुपरकम्प्युटर किसे कहते हैं (Supercomputer Kise Kehte Hai)

1994 में थिंकिंग मशीन ने खुद को दिवालिया विश्व भर में घोषित कर दिया.

1995 में क्रें कंप्यूटर ने भी खुद को दिवालिया विश्व के सामने घोषित कर दिया और फिर 1 साल बाद सुपर कंप्यूटर के जनक कहे जाने वाले सीमोर क्रें का स्वर्गवास हो गया. फिर सिलिकॉन ग्राफिक ने क्रें रिसर्च को अपने अधीन कर लिया.

1997 इंटेल कंपनी पेटीएम प्रोसेसर द्वारा एक सुपर कंप्यूटर का निर्माण किया और फिर sandiya National laboratories दुनिया का सबसे पहला tflops सुपरकंप्यूटर बनकर लोगों के सामने उभर के दुनिया के सामने आया.

2008 cray research और oak ride National laboratory द्वारा जैगुआर सुपरकंप्यूटर दुनिया का सबसे पहला pflops सुपरकंप्यूटर बनकर विकसित हुआ. फिर इसे जापान और चीन कंपनियों के द्वारा पीछे छोड़ दिया गया.

2011 और 13 इसी वर्षों के अंदर अंदर जैगुआर कंप्यूटर को अपग्रेड करके टाइटन सुपर कंप्यूटर का नाम प्रदान किया गया और फिर कुछ समय के लिए दुनिया का सबसे फास्टेस्ट सुपरकंप्यूटर यही बन गया. इस सुपरकंप्यूटर को चीन के एक सुपर कंप्यूटर Tianhe-2 ने पीछे छोड़ दिया.

2018 जून के महीने में Oak ridge कंपनी में आईबीएम सम्मिट 200-petaflop नामक एक सुपरकंप्यूटर को स्थापित किया गया और अब तक यह दुनिया का सबसे शक्तिशाली और फास्ट सुपर कंप्यूटर माना जाता है.

सुपरकंप्यूटर कैसे काम करता है (Supercomputer Kaise Kaam Karta Hai)

इसकी जरूरत इंजीनियर और वैज्ञानिक प्रयोग में होती है. जिन कार्यों में बहुत ज्यादा Database और High Level Calculation की गणना की आवश्यकता होती है, वहां इसका इस्तेमाल किया जाता है. यह बहुत तेज शक्तिशाली और महंगे कंप्यूटर होते हैं. सुपर कंप्यूटर का इस्तेमाल Special Operation में भी किया जाता है, क्योंकि स्पेशल ऑपरेशन में समय की बहुत कमी होती है.

सुपरकंप्यूटर क्या काम करता है (Supercomputer Kya Kaam Karta Hai)

1. मौसम की भविष्यवाणी
2. परमाणु ऊर्जा अनुसंधान
3. तरल गतिशील करना
4. तेल और गैस की खोज
5. आणविक मॉडलिंग
6. क्वांटम यांत्रिकी
7. एनिमेटेड ग्राफिक्स
8. जेनेटिक एनालिसिस
9. कोड ब्रेकिंग
10. शारीरिक सिमुलेशन
11. जलवायु अनुसंधान

सुपरकंप्यूटर की कीमत (Price of Supercomputer)

इसकी कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि यह कितनी Floating Point Per Second   की Speed से गणना करता है. जो सुपर कंप्यूटर जितना Fast होता है उसकी कीमत उतनी ही ज्यादा होती है. एक आम सुपर कंप्यूटर की कीमत $20,000 होती है लेकिन बड़े सुपर कंप्यूटर की कीमत 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक होती है.

दुनिया का सबसे तेज सुपरकंप्यूटर (Duniya Ka Sabse Tej Supercomputer)

1. फुगाकु
2. समिट
3. सिएरा
4. सनवे ताईहुलाइट
5. पर्लमटर
6. सेलेन
7. एकपीसी5
8. फ्रॉनटेरा
9. टियान
10. दम्मम

भारत का सबसे तेज सुपरकंप्यूटर (Bharat Ka Sabse Tej Supercomputer)

1. परम सिद्धि AI
2. प्रत्युष
3. मिहिर
4. आदित्य
5. कलर ब्लॉसम
6. सहसरत
7. परम युवा- II
8. पदम
9. परम शिवाय
10. वर्गो

सुपरकंप्यूटर की विशेषतायें (Supercomputer Ki Visheshataen)

1. यह एक शक्तिशाली उपकरण है.
2. आकार में सामान्य कंप्यूटर से अधिक बड़ा होता है.
3. यह काफी महंगा कंप्यूटर है.
4. आम कंप्यूटर की तुलना में अधिक गणना कर सकता है.
5. इसमें Multi Processing और Parallel Processing होता है.
6. यह Data को अधिक गति से Process करता है.
7.  यह Von Neumann Concept के उलट काम करता है.

सुपरकंप्यूटर के फ़ायदे (Supercomputer Ke Fayde)

इस कंप्यूटर का इस्तेमाल IBM, PayPal जैसी बड़ी कंपनियां करती है. यह कंप्यूटर न सिर्फ आम कंप्यूटर से ज्यादा गति प्रदान करता है बल्कि ऑनलाइन होने वाली धोखाधड़ी को भी कम करता है. सामान्य कंप्यूटर की तुलना में हजारों गुना तेजी से कम समय में यह सुपर कंप्यूटर काम करता है. आजकल की भागदौड़ भरी दुनिया में यह लोगों की जरूरत बन चुका है. कुछ क्षेत्र तो ऐसे हैं जहां लोग इस पर पूरी तरह आश्रित हो गए हैं.


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